म्मू-कश्मीर के रियासी जिले में एक भयानक लैंडस्लाइड हुआ है, जिसने इलाके में भारी तबाही मचा दी है। माहौर क्षेत्र में हुई इस लैंडस्लाइड के कारण आए मलबे में कम से कम 7 लोगों की मौत हो गई है। इसके साथ ही कई और लोग मलबे के नीचे दबे होने की आशंका जताई जा रही है। उनके लिए रेस्क्यू ऑपरेशन तुरंत शुरू कर दिया गया है। पुलिस और सेना के जवान राहत और बचाव कार्य में जुटे हुए हैं, और स्थानीय लोग भी मलबे के नीचे फंसे लोगों को खोजने में मदद कर रहे हैं। वहीं, इस आपदा में कई घर बह गए हैं, जिससे लोगों का घर-बार भी तबाह हो गया है।
जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश से तबाही का मंजर
जम्मू-कश्मीर पिछले कई दिनों से लगातार भारी बारिश और प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहा है। इलाके में बार-बार बादल फटने, फ्लैश फ्लड और लैंडस्लाइड जैसी घटनाएं हो रही हैं, जो जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर रही हैं। तवी और ब्यास नदियां उफान पर बह रही हैं, जिससे नदी किनारे बसे कई घर कटाव के शिकार हो गए हैं और बह गए हैं। जम्मू-श्रीनगर हाईवे, मनाली-लेह हाईवे समेत कई महत्वपूर्ण सड़क मार्ग भी भारी बारिश और लैंडस्लाइड के कारण टूट चुके हैं, जिससे कई गांव और शहर मुख्य क्षेत्रों से कट गए हैं। लोग अपनी सुरक्षा के लिए दूसरे सुरक्षित इलाकों में शिफ्ट हो रहे हैं।
रेल और सड़क यातायात प्रभावित
जम्मू-कश्मीर में खराब मौसम और प्राकृतिक आपदाओं के कारण यातायात पर भी गहरा असर पड़ा है। नॉर्दर्न रेलवे ने मौसम की खराबी और खराब हालात को देखते हुए जम्मू-कश्मीर के लिए 45 ट्रेनों को रद्द करने का फैसला लिया है। पिछले चार दिनों से रेल यातायात बाधित है, खासकर कठुआ और उधमपुर के बीच ट्रेनों का संचालन बंद है। जम्मू, कटरा और उधमपुर जैसे बड़े रेलवे स्टेशनों पर भी ट्रेनों की आवाजाही ठप हो गई है। इसी प्रकार, भारी बारिश और लैंडस्लाइड के कारण सड़कों की स्थिति बेहद खराब हो गई है, जिससे सड़क मार्ग से आवाजाही भी मुश्किल हो रही है।
मलबे के नीचे फंसे लोगों की तलाश जारी
माहौर इलाके में हुए लैंडस्लाइड के बाद राहत और बचाव कार्य तेज़ी से चल रहा है। पुलिस, सेना और स्थानीय लोग मिलकर मलबे के नीचे दबे लोगों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। इस आपदा में फंसे लोगों की संख्या का सटीक पता नहीं चल पाया है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि बचाव अभियान के दौरान अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जाएगा। मलबे के साथ-साथ वहां पानी का भी दबाव है, जो राहत कार्य को और भी कठिन बना रहा है।
सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया
सरकार और स्थानीय प्रशासन ने इस प्राकृतिक आपदा को गंभीरता से लिया है। प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाने के साथ ही अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती भी की गई है। साथ ही प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी राहत शिविर बनाए जा रहे हैं, ताकि वे सुरक्षित रह सकें। मौसम विभाग की तरफ से भी सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए गए हैं और लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
निष्कर्ष
जम्मू-कश्मीर में प्राकृतिक आपदाओं का सिलसिला लगातार जारी है, जो वहां के लोगों के लिए एक बड़ा संकट बन चुका है। लैंडस्लाइड, भारी बारिश और बाढ़ ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। प्रशासन और सेना द्वारा राहत कार्य जारी है, लेकिन इस प्रकृति की चुनौती से निपटना बेहद कठिन है। ऐसे समय में हर व्यक्ति को सतर्क रहना और आपदा प्रबंधन टीमों के साथ सहयोग करना आवश्यक है, ताकि नुकसान को कम किया जा सके और जल्दी से प्रभावित लोगों की मदद पहुंचाई जा सके।