अमेरिकी राजनीति में इन दिनों एक पुरानी तकनीक, ऑटोपेन, को लेकर ज़बरदस्त राजनीतिक हंगामा मचा हुआ है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि सत्ता में लौटने पर वह उन सभी दस्तावेज़ों को रद्द कर देंगे, जिन पर पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन ने ऑटोपेन से हस्ताक्षर कराए थे। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ (Truth Social) पर आरोप लगाया कि यह रोबोटिक पेन किसी और के इशारों पर चलाया गया, और बाइडेन ने खुद कई अहम आदेशों पर हस्ताक्षर नहीं किए।
ट्रंप का दावा है कि मशीन से किए गए ये सभी सिग्नेचर बाइडेन की मंजूरी के बिना हुए थे, इसलिए ये आदेश अवैध हैं। अगर यह बात सही मानी जाए, तो इसका सीधा असर बाइडेन के उन बड़े-बड़े एक्जीक्यूटिव ऑर्डर्स पर पड़ सकता है, जो स्वास्थ्य सेवाओं, पर्यावरण संबंधी फैसलों, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव लाए थे।
ऑटोपेन क्या होता है?
ऑटोपेन (Autopen) एक रोबोटिक सिग्नेचर मशीन है जिसका पेटेंट 1803 में हुआ था। यह मशीन किसी व्यक्ति के असली हस्ताक्षर की बिल्कुल सटीक नकल कर सकती है और इसीलिए इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर करने के लिए किया जाता है।
अमेरिकी न्याय विभाग ने 2005 में ही स्पष्ट कर दिया था कि राष्ट्रपति खुद सिग्नेचर करने के बजाय, किसी अधीनस्थ को निर्देश देकर ऑटोपेन के ज़रिए भी बिल को कानून बना सकते हैं, बशर्ते यह काम राष्ट्रपति के आधिकारिक निर्देश पर किया गया हो।
क्या पहले के राष्ट्रपति भी इसका इस्तेमाल करते थे?
ऑटोपेन कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह व्हाइट हाउस की एक सामान्य और मान्य प्रक्रिया रही है। व्हाइट हाउस में इसका इस्तेमाल 1800 के दशक की शुरुआत से ही होता आ रहा है, जिसकी शुरुआत राष्ट्रपति थॉमस जैफरसन से हुई थी।
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जॉन एफ केनेडी, लिंडन बी जॉनसन, और जेराल्ड फोर्ड जैसे कई राष्ट्रपतियों ने भी इसे अपनाया।
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बराक ओबामा ने विदेश यात्रा के दौरान इसी मशीन से महत्वपूर्ण विधेयक साइन कराए थे।
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खुद डोनाल्ड ट्रंप ने भी स्वीकार किया था कि उन्होंने कम ज़रूरी कागज़ों पर ऑटोपेन का इस्तेमाल किया था।
इतिहास बताता है कि जब किसी राष्ट्रपति को कम समय में हज़ारों दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर करने होते हैं या वे देश से बाहर होते हैं, तो यह मशीन बेहद उपयोगी साबित होती है।
बाइडेन के ऑटोपेन इस्तेमाल पर हंगामा क्यों?
ट्रंप और उनके समर्थक लगातार यह दावा करते रहे हैं कि बाइडेन के कई आदेश वास्तव में उनके खुद के नहीं, बल्कि मशीन से किए गए सिग्नेचर थे, और वह भी किसी अज्ञात व्यक्ति के निर्देश पर। उनका आरोप है कि बाइडेन के 92% आदेश ऑटोपेन से हस्ताक्षरित थे, जो उनकी मंजूरी के बिना अवैध हैं।
हालांकि, अब तक ऐसा कोई ठोस कानूनी सबूत सामने नहीं आया है कि सिग्नेचर बाइडेन की जानकारी या रजामंदी के बिना किए गए हों। एक रिपब्लिकन-नेतृत्व वाली समिति ने रिपोर्ट ज़रूर जारी की, लेकिन उसमें यह प्रमाणित नहीं किया गया कि बाइडेन अपनी नीतियों या आदेशों से अनजान थे
क्या ट्रंप बाइडेन के आदेश रद्द कर सकते हैं?
कानूनी रूप से, एक नया राष्ट्रपति अपने पूर्ववर्ती के एक्जीक्यूटिव ऑर्डर्स (Executive Orders) को वापस ले सकता है, यह संभव है। हालाँकि, यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि ऑटोपेन से किए गए सिग्नेचर कानूनी रूप से पूरी तरह मान्य होते हैं, जब तक यह साबित न हो जाए कि राष्ट्रपति ने स्वयं इसके लिए निर्देश नहीं दिया था।
ट्रंप की यह घोषणा राजनीतिक रूप से बेहद असरदार हो सकती है, लेकिन कानूनी रूप से इसकी सीमाएँ स्पष्ट हैं। सिर्फ ऑटोपेन का उपयोग अवैधता का प्रमाण नहीं है। दूसरी ओर, पार्डन (माफी) को वापस लेना राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता, भले ही वह ऑटोपेन से साइन किया गया हो।